गोगवान में ‘गारा खेल’ का बड़ा खुलासा: तालाब खुदाई के नाम पर भ्रष्टाचार, गांव की मुख्य सड़क हुई बदहाल
गोगवान, जिला शामली | NDUP रिपोर्ट
जनपद शामली के गांव गोगवान में तालाब खुदाई के नाम पर चल रहे कार्यों ने विकास की तस्वीर सुधारने के बजाय हालात को और बिगाड़ दिया है। गांव में जहां एक ओर तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य कागज़ों में तेजी से चल रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मौके पर पहुंची NDUP टीम ने जो दृश्य देखे, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि पूरे कार्य पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

तालाब से निकाले जा रहे गारे को नियमानुसार बाहर निर्धारित स्थान पर डंप किया जाना चाहिए था, लेकिन यहां मशीनों द्वारा उसी गारे को दोबारा तालाब के गड्ढे में ही दबाया जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गारा बाहर नहीं निकाला जाएगा तो तालाब की गहराई और जलभराव क्षमता दोनों प्रभावित होंगी, जिससे पूरे कार्य का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। तालाब खुदाई के नाम पर गांव की मुख्य सड़क, जो कि रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है, उसे पूरी तरह से खराब कर दिया गया है। सड़क पर हर जगह कीचड़ और पानी भर जाने से पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चों को रोजाना इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है, जहां उन्हें फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार बच्चे गिर चुके हैं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता किसी सजा से कम नहीं रह गया है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि ठेकेदार द्वारा मनमानी तरीके से कार्य किया जा रहा है। न तो किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था है और न ही कार्य की निगरानी सही ढंग से हो रही है। जब इस संबंध में ठेकेदार से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए स्पष्ट जवाब देने से बचने का प्रयास किया, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जो धन आवंटित किया जाता है, वह यदि इसी प्रकार गारे में दबा दिया जाएगा तो गांव का विकास कैसे संभव होगा। लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए जानी जाती है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएगा और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सिर्फ एक तालाब या एक सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास कार्यों की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘गारा खेल’ पर कब तक संज्ञान लेता है और गांव गोगवान को इस समस्या से कब राहत मिलती है।